Saturday, August 9, 2008

::तीन टुक़ड़े:::

[1]

::मूड:::

मैने पेड़ों की
झुरमुट से झाँका
तुम बैठी थी
सोचा.. नीचे आ कर..
तुम्हारे बगल में बैठूं...
फिर जाने क्या हुआ..
मैं फुर्र से
नीले गगन में उड़ गया..

[2]

::तरक़्क़ी:::

मैं बस स्टॉप पर लगा
नीम का पेड़ था
उस दिन बरसात में
तुम आ कर रुकी थी जब
मैं अपनी
नीम नीम आँखों से
तुम्हें देख रहा था
जब 23 नंबर की बस आई
तुम चली गयी..
तबसे रोज़ शाम
तुम मेरे पास आती थी..
और मैं शरारत में
अपने सूखे पत्ते गिरा कर
तुम्हें परेशान करता था.
कभी चुपके से
कोई पत्ता
तुम्हारे बालों पे गिरा देता
तुम घर जा कर
देखती होगी..
और मुझे याद करती होगी
.......
...अब.. तुम्हारी
'तरक़्क़ी' हो गयी है..
तुमने कार ले ली है..
मेरे सामने से तुम
तेज़ी से गुज़र जाते हो
तुम्हें मैं ठीक से
देख भी नहीं सकता.....

[3]

तुम बालकनी में
टहल रहे थे
मैं चाँद था..
तुमको एक टक
देख रहा था..
तुम भी मुझे ही
देख रही थी..
एक हवाई जहाज़ निकला
न जाने किधर से..
तुम उसे
देखने लगी
जब तक
वो आँखों से
ओझल न हो गया..
मैं तुम्हें और उसे देखता रहा..
फिर तुम्हारी नज़रें
लौट आईं मुझ पर..
पर मैं गुस्से में था
बादल का इक टुक़ड़ा
अपने सामने कर दिया
जब गुस्सा ठंडा हुआ..
बादल हटाया..
तुम न जाने कहाँ गयी......
.....

..मस्तो...

Saturday, June 21, 2008

::Jwaab:::




:::
सवाल इतने थे उनसे, जनाब.., क्या मिलते..
नज़र मिली ही नहीं तो..जबाब क्या मिलते...

मस्तो

Saturday, May 17, 2008

::good morning:::...

::::.....
सुबह उठ कर
मैं परदे हटाता हूँ
खिड़कियाँ खोलता हूँ
हवा का इक झोंका
मेरे गालों को बोसे देता है
बालों में हाथ फेरता है
और बदमाश सूरज
मासूम किरनें भेजता है
बिज़ली के तारों पे बैठी चिडियाँ
कोई गीत गातीं हैं..
और उनके सुर के ऊपर
कोयल सुर लगाती है ...
...
तभी कमरे के अन्दर
मोबाइल बोलता है..
जानता हूँ तुमने
"good morning"
sms किया होगा..

-मस्तो
11may 2008

Monday, May 5, 2008

:::: रोईद: ::.......

:::......
सबको गले लगाता हूँ
ना जाने क्यों ऐसा हूँ

माँ अक्सर ये कहतीं हैं
मैं छोटा सा बच्चा हूँ

यादों के जंगल में ,मैं
भागा भागा फिरता हूँ

सबके हाथों खर्च हुआ
मैं क्या रुपया पैसा

मुद्दत बाद मिला है वो
पूछ ना बैठे कैसा हूँ

तुमने जैसा छोडा था
देखो अब भी वैसा हूँ