बुधवार, 8 अगस्त 2007

Afsana ~~मैं कौन हूँ..?~~



सदियों से खुद को खोज रहा
मैं खुद से मिलूँगा जाने कब..!?










मैं कौन हूँ..?

:::.......
इक रोज़ खुदा ने
इंद्रधनुष के रंगो को
एक शीशी में बंद किया...
उस शीशी को
हल्का हिला के
एक कैनवस पे
उड़ेल दिया..
उस कैनवस पे
मेरी तस्वीर उभरी थी...

वो तस्वीर बना के
'खुदा' सोने को गये
फ़रिश्तो ने,शाम ढले
उसपे कुछ..ख़ुश्बू डाली..

ढलते सूरज की
रोशनी छिड़की...
....
आधी रात में
शैतान ने
वो तस्वीर चुरा ली...
...पर वो तो
आम सी तस्वीर दिखती थी
..
अब चुरा ली
तो क्या करता..
दो रोज़
अपने पास रखी,
फिर उभ के
मिट्टी में
दफ़ना दी..
सदियों-सदियों
वो दफ़न रही...
एक रोज़
फरिश्ते मिट्टी में
खेल रहे थे..
उनके पैरों से
कुछ मिट्टी हटी
मेरी तस्वीर मिली
तस्वीर से मुझको
बाहर निकाल..
धरती पर उन्होने
छोड़ दिया..
मैं तबसे
 धरती पर हूँ
उन रंगों की
तलाश में हूँ

कुछ रंग मिलें हैं..
खुश्बू भी..
ढूँढ रहा हूँ
क्या क्या
खुद मे समेटे हूँ..
"मैं कौन हूँ ?"
अब तक तलाश ये ज़ारी है...

4 comments:

Nimisha ने कहा…

jab aapki ye talash puri ho to samajh jayen ki abhi aur, bahot aage tak jana hai...

Shilpa Bhardwaj ने कहा…

Amazing amazing amazing bhai... mazaa aa gaya humein padhkar... farishton ne aadi tirchi kismat likhe di... awesome...

बेनामी ने कहा…

kya khub kaha hai apne, apne ko jaan le to kya kahne.

junaid ने कहा…

hum hi mein na thi koi baatyaad natumko aa sake tumne hamen bhula diyahum na tumhe bhula sake