बुधवार, 30 जून 2010

Aazamgarh

 
शहर पुराना
जाग रहा है
गाये शोर मचाती हैं
चिड़िया गाना गाती है
माओं ने घर की
कुण्डी खोली
इक ठंडी हवा का झोंखा
घर के अंदर घुस आया
संग अलग सी खुशबू लाया
बच्चे
बिस्तर छोड़ रहें हैं..
कुछ बिस्तर पे लोट रहें हैं
कुछ बच्चे
नदी नहाने निकले..
धोभी और गधे भी निकले
सुबह की अज़ान होने वाली है
मंदिर की घंटी बजने वाली है
बच्चे -बूढ़े
टहलने निकले
ग्वाले अब
साइकल से निकले
शहर पुराना
सदियों सदियों से
आँखें मून्दे जाग रहा है
न जाने
कब आँखे खोले...

1 comments:

anu ने कहा…

Bahut achcha......apna Gao bhi yaad aa gya :)