बुधवार, 30 जून 2010

Badhiya hai !!



दिल की कोठारी में बंद है
तुम्हारी याद
नुमाइश
अच्छी नही लगती
बंद रहने दो ना
मैं जनता हूँ
तुम ओढ़ लेती हो मुझको
मैं
तुम्हें महसूस करता हूँ...
..अगर सच है..
तो क्यों झूट लगता है..
या बस
तसल्ली देता हूँ
खुद को...