पढ़ो अगर
तो बस पढ़ नही लेना
कहानी में
किरदारों ने
बस उतना ही नही
कहा है
बहुत से अल्फ़ाज़
मैने कहने नही दिए उनको
मेरे कहने पे
कितने एहसासों को
किरदारों ने ना ज़ाहिर किया है
पर एसा भी नहीं
वो सब बातें
मेरी मानते हैं
कभी मैं कहता हूँ
वो करतें हैं
कभी वो कहतें हैं
मैं करता हूँ
हर किरदार मुझमे जिया है.
मुझ मे मरा है
पढ़ो अगर
तो बस पढ़ नही लेना..
कहानी की भी एक कहानी होती है...
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