बुधवार, 30 जून 2010

वक़्त

[१]
ज़रा
धीरे चल
बस
घड़ी भर
साँस लेने दे...
....
दम निकलता है...


[२]
जी चाहता है
उसके चेरे पे
तुम्हारा चेहरा
लगा दूं..
नहीं... नहीं...
तुम्हारे चेहरे पर
उसका
नाम दे दूं
उसको
तुम्हारा

1 comments:

mahen ने कहा…

ज़रा
धीरे चल
बस
घड़ी भर
साँस लेने दे...
....
दम निकलता है...

aah.. kya lahja hai..