बुधवार, 30 जून 2010

"सच"

मैं
कितना पागल हूँ
ये बस
दो लोग जानते हैं
इक मैं
इक माँ

2 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

माँ तो सब जानती है...

उम्दा रचना.

M VERMA ने कहा…

माँ से क्या छुपा है भला