कब थामा था..
कब छूटा था
कब पाया था
कब खोया था
इसका मुझको होश नही...
हाँ जब तक हम साथ रहे
वो पल-पल अब भी ज़िंदा है
साँसों मे ताबिन्दा है
उस पल मे अब भी हरकत है
आँखो मे अब भी
चलता है...
पर कब पकड़ा
कब छोड़ा था
कब जागा
कब सोया था
इसका मुझको होश नही...
इसका मुझको होश नही.
4 comments:
आज 15/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
बहुत सुंदर....
न कुछ खोया ...न कुछ पाया....
"मैं इक मुद्दत से जिसको खोजता हूँ.....वो इक मुद्दत से मेरे साथ ही है......!! "
सुन्दर..बहुत सुन्दर रचना
सुन्दर अभिव्यक्ति:-)
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